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बांग्लादेश में चुनाव से पहले लहूलुहान हुआ अल्पसंख्यक समाज: दुकान में घुसकर हिंदू कारोबारी की हत्या, क्या फिर सुलग रहा है मैमनसिंह?

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मैमनसिंह (बांग्लादेश): लोकतंत्र के उत्सव से ठीक पहले बांग्लादेश की गलियां एक बार फिर अपनों के खून से सुर्ख हो उठी हैं। देश में होने वाले ऐतिहासिक संसदीय चुनावों से महज 48 घंटे पहले मैमनसिंह के त्रिशाल इलाके में एक ऐसी वारदात हुई है जिसने पूरे अल्पसंख्यक समाज को हिलाकर रख दिया है। 62 वर्षीय हिंदू कारोबारी सुसेन चंद्र सरकार की उनकी अपनी ही दुकान के भीतर बेरहमी से हत्या कर दी गई। यह हत्या महज एक क्राइम नहीं बल्कि उन आशंकाओं पर मुहर है जो चुनाव से पहले जताई जा रही थीं।

दुकान का शटर गिराया और फिर…

चश्मदीदों और पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सुसेन चंद्र रोज की तरह अपनी चावल की दुकान पर थे। हमलावरों ने जिस तरह से इस वारदात को अंजाम दिया वह किसी गहरी साजिश की ओर इशारा करता है। हमलावरों ने पहले दुकान का शटर बाहर से गिराया ताकि सुसेन को भागने या मदद मांगने का मौका न मिले। इसके बाद धारदार हथियारों से उन पर ताबड़तोड़ हमला किया गया।

काफी देर तक जब सुसेन घर नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। बंद दुकान के भीतर वह खून से लथपथ हालत में मिले। मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज ले जाते समय उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके बेटे सुजान सरकार का कहना है कि हत्यारे दुकान से बड़ी नकदी भी ले गए हैं लेकिन जिस क्रूरता से हत्या की गई वह केवल लूटपाट का मामला नहीं लगता।

डर के साये में ‘मतदान’

शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद यह बांग्लादेश का पहला बड़ा चुनाव है। गुरुवार को होने वाली वोटिंग से पहले पूरे देश में तनाव चरम पर है। बांग्लादेश हिंदू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल ने पहले ही चेतावनी दी थी कि जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आएगी हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ सकते हैं। सुसेन की हत्या ने उस डर को हकीकत में बदल दिया है।

आंकड़ों में भयावहता: दिसंबर से अब तक का खूनी खेल

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के लिए पिछला एक साल किसी काले अध्याय से कम नहीं रहा है। रिपोर्ट्स की मानें तो:

  • 1 दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच 15 से अधिक हिंदुओं की जान जा चुकी है।

  • सिर्फ दिसंबर महीने में ही सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनाएं दर्ज हुईं।

  • इससे पहले 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की हत्या ने दुनिया को चौंका दिया था जिन्हें भीड़ ने मारकर पेड़ से लटका दिया था।

ग्राउंड रिपोर्ट: न्याय की उम्मीद धुंधली

मैमनसिंह के स्थानीय हिंदुओं का कहना है कि सुसेन चंद्र एक साधारण व्यापारी थे जिनकी किसी से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले उन्हें निशाना बनाना एक स्पष्ट संदेश है दहशत का माहौल पैदा करना। प्रशासन ने जांच का भरोसा तो दिया है लेकिन जिस तरह से बीते दो महीनों में हिंसा का ग्राफ बढ़ा है अल्पसंख्यकों का भरोसा पूरी तरह हिल चुका है।

क्या कल होने वाले चुनावों में बांग्लादेश का अल्पसंख्यक समाज बेखौफ होकर घर से निकल पाएगा? सुसेन चंद्र सरकार की बंद दुकान और वहां बिखरा खून आज ढाका से लेकर मैमनसिंह तक यही सवाल पूछ रहा है।

Gold Silver Price Today: सोना और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, MCX पर चांदी ₹5000 से ज्यादा टूटी, जानें अब क्या करें?

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नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। सर्राफा बाजार में पिछले कई दिनों से जारी तूफानी तेजी पर मंगलवार को ब्रेक लग गया। वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और ऊंचे स्तरों पर निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली (Profit Booking) के चलते सोने और चांदी की कीमतों में नरमी देखी गई। एमसीएक्स (MCX) पर चांदी की कीमतों में करीब 2% की बड़ी सेंध लगी है जिसने उन खरीदारों को राहत दी है जो कीमतों में सुधार का इंतजार कर रहे थे।

बाजार में क्यों आई गिरावट?

इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण डॉलर इंडेक्स का मजबूत होना है। मंगलवार को डॉलर इंडेक्स उछलकर 97.01 के स्तर पर पहुंच गया। जब भी डॉलर मजबूत होता है विदेशी खरीदारों के लिए सोना-चांदी महंगा हो जाता है जिससे डिमांड पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा हालिया रिकॉर्ड तेजी के बाद ट्रेडर्स ने अपना मुनाफा घर ले जाना बेहतर समझा, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा।

MCX पर क्या हैं ताज़ा आंकड़े?

  • सोना: फरवरी वायदा में सोना 0.33% फिसलकर ₹1,57,550 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा। हालांकि दिन के निचले स्तर (₹1,56,001) से इसमें अच्छी रिकवरी भी देखी गई।

  • चांदी: मार्च वायदा में चांदी 1.92% टूटकर ₹2,57,567 प्रति किलोग्राम पर आ गई। कारोबार के दौरान एक समय चांदी ₹2,57,100 के निचले स्तर तक भी चली गई थी।

भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व की नज़र

भले ही आज कीमतों में गिरावट आई हो लेकिन जानकारों का मानना है कि सोने की चमक फीकी नहीं पड़ने वाली। अमेरिका और ईरान के बीच समुद्र में बढ़ता तनाव और वाशिंगटन की ओर से जारी चेतावनी ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इतिहास गवाह है कि जब भी युद्ध जैसी स्थिति बनती है निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित ठिकाना (Safe Haven) मानते हैं।

साथ ही बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरों में कम से कम दो बार कटौती कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो सोने की कीमतों को नया रॉकेट फ्यूल मिल सकता है।

एक्सपर्ट की राय: अब आगे क्या?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक चांदी के लिए $65–$70 का बैंड एक मजबूत सपोर्ट का काम कर रहा है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल डेटा और महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी जो सोने की अगली दिशा तय करेंगे।

प्रमुख रेजिस्टेंस और सपोर्ट लेवल:

  • सोना: सपोर्ट ₹1,56,600 | रेजिस्टेंस ₹1,59,100

  • चांदी: सपोर्ट ₹2,55,500 | रेजिस्टेंस ₹2,68,000

Cyber Crime Update: अमित शाह का बड़ा एक्शन, साइबर ठगों के ₹8000 करोड़ किए फ्रीज; अब 31 दिसंबर तक बदलेगा पूरा सिस्टम

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नई दिल्ली: भारत की डिजिटल प्रगति के साथ-साथ अब साइबर अपराधियों ने भी अपना कॉरपोरेट ऑफिस खोल लिया है। गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को आगाह किया कि साइबर अपराध अब छिटपुट घटनाएं नहीं बल्कि एक संस्थागत (Institutionalised) खतरा बन चुका है। सीबीआई (CBI) द्वारा आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस में शाह ने साफ कर दिया कि ठग भले ही तकनीक में दो कदम आगे रहने की कोशिश करें लेकिन मोदी सरकार उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए निर्णायक युद्ध छेड़ चुकी है।

ठगों की जेब से वापस आए ₹8000 करोड़

गृह मंत्री ने आंकड़ों के जरिए साइबर सुरक्षा की गंभीर तस्वीर पेश की। 30 नवंबर 2025 तक देश में लगभग 82 लाख साइबर शिकायतें दर्ज की गईं जिनमें से 1.84 लाख मामलों को FIR में बदला गया। शाह ने एक बड़ी कामयाबी का जिक्र करते हुए बताया कि सुरक्षा एजेंसियों और I4C (भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र) की मुस्तैदी से ठगों द्वारा उड़ाए गए ₹20,000 करोड़ में से ₹8,000 करोड़ से अधिक की राशि को फ्रीज या रिकवर कर लिया गया है।

तीन स्तंभों पर प्रहार: सिम, बैंक खाते और ‘साइबर गुलामी’

अमित शाह ने जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि अब सिर्फ अपराधी को पकड़ना काफी नहीं है बल्कि उस पूरे इकोसिस्टम को उखाड़ना होगा जिससे ये अपराध फल-फूल रहे हैं। सरकार अब तीन मोर्चों पर एक साथ वार कर रही है:

  1. फाइनेंशियल पिलर: म्यूल अकाउंट्स (किराये के खाते) और मनी लॉन्ड्रिंग के रास्तों को बंद करना।

  2. टेलीकॉम पिलर: फर्जी SIM और eSIM के गलत इस्तेमाल पर लगाम।

  3. ह्यूमन पिलर: ‘साइबर स्लेवरी’ यानी मानव तस्करी के जरिए जबरन ठगी करवाने वाले विदेशी स्कैम कंपाउंड्स का खात्मा।

31 दिसंबर तक सभी बैंक होंगे एक ही ‘कवच’ के नीचे

डिजिटल सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए शाह ने एक बड़ी डेडलाइन तय की है। वर्तमान में 62 बैंक और वित्तीय संस्थान रीयल-टाइम रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क से जुड़े हैं। गृह मंत्री ने लक्ष्य रखा है कि 31 दिसंबर 2025 तक देश के सभी कोऑपरेटिव बैंकों को भी इस सुरक्षा घेरे में शामिल कर लिया जाएगा ताकि ठगी होते ही पैसा तुरंत ब्लॉक किया जा सके।

CBI की नई विंग और S4C डैशबोर्ड लॉन्च

इस अवसर पर गृह मंत्री ने सीबीआई की नई साइबर क्राइम ब्रांच का उद्घाटन किया और I4C का S4C डैशबोर्ड भी लॉन्च किया। यह डैशबोर्ड देश भर की एजेंसियों को डेटा शेयरिंग और रियल-टाइम एक्शन में मदद करेगा। शाह ने साफ कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल अब सिर्फ अपराधी ही नहीं बल्कि हमारी पुलिस भी करेगी ताकि सीमित जनशक्ति के बावजूद जांच की रफ्तार को कई गुना बढ़ाया जा सके।

भारत-UK का बड़ा दांव: अब विदेश में काम करने वाले भारतीयों की सैलरी में होगी भारी बचत, जानें क्या है नया सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट

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नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: भारत और ब्रिटेन के बीच रिश्तों की नई इबारत लिखते हुए मंगलवार को राजधानी दिल्ली में एक ऐसे समझौते पर मुहर लगी जिसका इंतजार लाखों प्रोफेशनल्स और टेक-दिग्गज लंबे समय से कर रहे थे। दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर ‘सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट’ (SSA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह समझौता सिर्फ एक सरकारी कागजात नहीं है बल्कि उन हजारों भारतीयों के लिए एक बड़ी वित्तीय राहत है जो शॉर्ट-टर्म प्रोजेक्ट्स के लिए ब्रिटेन जाते हैं।

क्या बदलेगा? अब दोहरी मार से मिलेगी मुक्ति

अब तक की स्थिति यह थी कि अगर कोई भारतीय कर्मचारी 2-3 साल के लिए ब्रिटेन जाता था तो उसे भारत और ब्रिटेन दोनों जगहों पर सोशल सिक्योरिटी (जैसे PF या नेशनल इंश्योरेंस) में योगदान देना पड़ता था। नए समझौते के तहत अब 36 महीने (3 साल) तक के असाइनमेंट पर जाने वाले कर्मचारियों को दोहरे योगदान से मुक्ति मिल जाएगी। यानी अब आपकी मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा टैक्स और डबल कटौती की भेंट नहीं चढ़ेगा।

डिप्लोमैटिक फ्रंट पर बड़ी जीत

इस ऐतिहासिक समझौते पर भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री और ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने हस्ताक्षर किए। लिंडी कैमरन ने इसे द्विपक्षीय व्यापार के लिए एक ‘बूस्टर डोज’ बताया है। गौरतलब है कि जुलाई 2025 में जब भारत-UK के बीच ‘व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता’ (CETA) हुआ था तभी इस डील की नींव रख दी गई थी।

कंपनियों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’

यह डील केवल कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय आईटी और सर्विस सेक्टर की कंपनियों के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगी।

  • लागत में कमी: कंपनियों को अब अपने कर्मचारियों के लिए दूसरे देश में भारी-भरकम सोशल सिक्योरिटी फंड जमा नहीं करना होगा।

  • प्रतिस्पर्धा: इससे वैश्विक बाजार में भारतीय सर्विस सेक्टर की लागत कम होगी और वे ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो सकेंगी।

  • CoC की सुविधा: कर्मचारी अब EPFO की वेबसाइट से ‘सर्टिफिकेट ऑफ कवरेज’ (CoC) हासिल कर सकेंगे, जो इस छूट का लाभ लेने के लिए आधार बनेगा।

CETA के साथ होगा लागू

MEA (विदेश मंत्रालय) के मुताबिक, यह सोशल सिक्योरिटी डील भारत-UK व्यापार सौदे का एक अहम हिस्सा है। इसे इस साल की पहली छमाही (2026) में CETA के साथ ही पूरी तरह लागू करने की योजना है। ब्रिटिश विदेश मंत्रालय का मानना है कि इस ‘डबल कॉन्ट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ (DCC) से द्विपक्षीय व्यापार में करीब £25.5 बिलियन की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

यह कदम साबित करता है कि भारत अब अपने ग्लोबल टैलेंट के हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से सौदेबाजी कर रहा है।