अहमदाबाद। नरेंद्र मोदी स्टेडियम की रोशनी में शुक्रवार रात कुछ ऐसा हुआ जो 2025 के क्रिकेट कैलेंडर को यादगार बना गया। साउथ अफ्रीका के भारत दौरे का आखिरी मैच पांचवें टी20 में टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 231 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया और फिर गेंदबाजों की कसी हुई फिरकी से प्रोटियाज को 201 पर रोक दिया। 30 रनों की इस जीत ने न सिर्फ सीरीज 3-1 से भारत के नाम की बल्कि साल के अंत में भारतीय फैंस को एक बड़ा तोहफा भी दे दिया।
मैच की शुरुआत में ही लग रहा था कि यह रात बल्लेबाजों की होगी। अभिषेक शर्मा ने 21 गेंदों पर 34 रन ठोककर पावरप्ले में माहौल सेट किया जबकि संजू सैमसन ने 37 रनों की संयमित पारी से नींव मजबूत की। लेकिन असली तूफान तब आया जब तिलक वर्मा और हार्दिक पांड्या क्रीज पर एक साथ उतरे। तिलक ने 42 गेंदों पर 73 रन बनाए – उनकी पारी में क्लास और टाइमिंग का ऐसा मिश्रण था कि गेंदबाज बेबस नजर आए। दूसरी तरफ हार्दिक ने महज 25 गेंदों में 63 रन ठोक डाले जिसमें 16 गेंदों पर फिफ्टी शामिल थी – भारतीय टी20 में दूसरी सबसे तेज। उनकी पारी में पांच छक्के और इतने ही चौके थे, स्टेडियम में बैठे दर्शक बार-बार खड़े होकर तालियां बजा रहे थे। एक तरह से हार्दिक ने साबित कर दिया कि वह पुरानी फॉर्म में लौट चुके हैं और टीम के लिए कितने अहम हैं।
232 रनों का लक्ष्य चेज करना आसान नहीं था खासकर जब क्विंटन डिकॉक जैसे धुरंधर विकेटकीपिंग के साथ-साथ बल्ले से भी कमाल दिखा रहे हों। डिकॉक ने अपने 100वें टी20 इंटरनेशनल में 35 गेंदों पर 65 रन बनाए, शुरुआत में तो लगा कि प्रोटियाज बाजी मार लेंगे। लेकिन फिर भारतीय गेंदबाजों ने कमाल दिखाया। जसप्रीत बुमराह ने सिर्फ 17 रन देकर 2 विकेट झटके, उनकी स्लोअर गेंदों ने डिकॉक को कैच आउट कराया।
वहीं वरुण चक्रवर्ती ने मिडिल ओवर्स में कहर बरपाया। 4 विकेट लेकर उन्होंने प्रोटियाज की कमर तोड़ दी। एक ओवर में दो विकेट लेकर उन्होंने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।
यह जीत सिर्फ एक मैच की नहीं, पूरे साल की मेहनत का नतीजा लगी। टेस्ट सीरीज हारने के बाद वनडे और टी20 में वापसी करना वह भी इतने दबाव में। यह भारतीय टीम की गहराई और जज्बे को दिखाता है। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम लगातार आठवीं द्विपक्षीय टी20 सीरीज जीत चुकी है। अब नजरें 2026 टी20 वर्ल्ड कप पर होंगी, जहां भारत घरेलू सरजमीं पर खिताब बचाने उतरेगा।
फैंस के लिए यह शाम भावुक भी थी। साल का आखिरी इंटरनेशनल मैच, स्टेडियम पैक, और जीत का जश्न। क्रिकेट प्रेमी जानते हैं क्योंकि ऐसे पल बार-बार नहीं आते।
