
नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: भारत और ब्रिटेन के बीच रिश्तों की नई इबारत लिखते हुए मंगलवार को राजधानी दिल्ली में एक ऐसे समझौते पर मुहर लगी जिसका इंतजार लाखों प्रोफेशनल्स और टेक-दिग्गज लंबे समय से कर रहे थे। दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर ‘सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट’ (SSA) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह समझौता सिर्फ एक सरकारी कागजात नहीं है बल्कि उन हजारों भारतीयों के लिए एक बड़ी वित्तीय राहत है जो शॉर्ट-टर्म प्रोजेक्ट्स के लिए ब्रिटेन जाते हैं।
क्या बदलेगा? अब दोहरी मार से मिलेगी मुक्ति
अब तक की स्थिति यह थी कि अगर कोई भारतीय कर्मचारी 2-3 साल के लिए ब्रिटेन जाता था तो उसे भारत और ब्रिटेन दोनों जगहों पर सोशल सिक्योरिटी (जैसे PF या नेशनल इंश्योरेंस) में योगदान देना पड़ता था। नए समझौते के तहत अब 36 महीने (3 साल) तक के असाइनमेंट पर जाने वाले कर्मचारियों को दोहरे योगदान से मुक्ति मिल जाएगी। यानी अब आपकी मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा टैक्स और डबल कटौती की भेंट नहीं चढ़ेगा।
डिप्लोमैटिक फ्रंट पर बड़ी जीत
इस ऐतिहासिक समझौते पर भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री और ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने हस्ताक्षर किए। लिंडी कैमरन ने इसे द्विपक्षीय व्यापार के लिए एक ‘बूस्टर डोज’ बताया है। गौरतलब है कि जुलाई 2025 में जब भारत-UK के बीच ‘व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता’ (CETA) हुआ था तभी इस डील की नींव रख दी गई थी।
कंपनियों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’
यह डील केवल कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय आईटी और सर्विस सेक्टर की कंपनियों के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगी।
-
लागत में कमी: कंपनियों को अब अपने कर्मचारियों के लिए दूसरे देश में भारी-भरकम सोशल सिक्योरिटी फंड जमा नहीं करना होगा।
-
प्रतिस्पर्धा: इससे वैश्विक बाजार में भारतीय सर्विस सेक्टर की लागत कम होगी और वे ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो सकेंगी।
-
CoC की सुविधा: कर्मचारी अब EPFO की वेबसाइट से ‘सर्टिफिकेट ऑफ कवरेज’ (CoC) हासिल कर सकेंगे, जो इस छूट का लाभ लेने के लिए आधार बनेगा।
CETA के साथ होगा लागू
MEA (विदेश मंत्रालय) के मुताबिक, यह सोशल सिक्योरिटी डील भारत-UK व्यापार सौदे का एक अहम हिस्सा है। इसे इस साल की पहली छमाही (2026) में CETA के साथ ही पूरी तरह लागू करने की योजना है। ब्रिटिश विदेश मंत्रालय का मानना है कि इस ‘डबल कॉन्ट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ (DCC) से द्विपक्षीय व्यापार में करीब £25.5 बिलियन की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
यह कदम साबित करता है कि भारत अब अपने ग्लोबल टैलेंट के हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से सौदेबाजी कर रहा है।