इस्लामाबाद/रावलपिंडी: पाकिस्तान की सियासत में इन दिनों सिर्फ नारों और मुकदमों का शोर नहीं है, बल्कि अडियाला जेल की सलाखों के पीछे से आई एक मेडिकल रिपोर्ट ने ‘पावर कॉरिडोर’ में खलबली मचा दी है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई (PTI) के संस्थापक इमरान खान की आंखों को लेकर छिड़ी बहस अब अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर तक पहुंच गई है। जहां एक तरफ समर्थक उनकी आंखों की रोशनी जाने के डर से सहमे हुए हैं, वहीं सरकार इसे एक ‘रूटीन चेकअप’ बताकर दावों को खारिज कर रही है।
आधी रात का वो ‘सीक्रेट’ मूवमेंट
खबर है कि पिछले शनिवार की रात इमरान खान को भारी सुरक्षा के बीच रावलपिंडी की अडियाला जेल से निकाल कर इस्लामाबाद के ‘पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ (PIMS) ले जाया गया। 73 वर्षीय खान, जो अल-कादिर ट्रस्ट मामले में सजा काट रहे हैं, पिछले कुछ समय से आंखों की तकलीफ की शिकायत कर रहे थे।
जेल में तैनात नेत्र विशेषज्ञों ने जब शुरुआती जांच की, तो उन्होंने तुरंत अस्पताल शिफ्ट करने की सलाह दी। इसके बाद जो हुआ, उसने सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म कर दिया।
20 मिनट का ऑपरेशन और सियासी वार-पलटवार
सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने गुरुवार को मोर्चा संभालते हुए स्पष्ट किया कि इमरान खान की आंखों की एक छोटी सी सर्जिकल प्रक्रिया (Minor Procedure) की गई है। तरार के मुताबिक, यह प्रक्रिया करीब 20 मिनट तक चली और इसके लिए इमरान खान से लिखित सहमति भी ली गई थी।
मंत्री का बयान:
“इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर फैलाई जा रही खबरें महज अफवाह हैं। डॉक्टरों की निगरानी में उनकी छोटी सी सर्जरी हुई है और फिलहाल उनके स्वास्थ्य संकेतक (Vitals) बिल्कुल सामान्य हैं। वे वापस जेल भेज दिए गए हैं।”
पीटीआई का ‘ब्लाइंडनेस’ वाला दावा
हालांकि, इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस मामले में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि खान एक खतरनाक नेत्र रोग से जूझ रहे हैं और अगर समय रहते सही इलाज नहीं मिला, तो वे हमेशा के लिए अपनी आंखों की रोशनी खो सकते हैं। समर्थकों का आरोप है कि जेल प्रशासन और सरकार खान की सेहत को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं, जो एक बड़े खतरे की ओर इशारा है।
आखिर में: सेहत या सियासत?
फिलहाल, इमरान खान वापस अपनी कोठरी में हैं और उन्हें कुछ दवाएं और सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। लेकिन पाकिस्तान जैसे देश में, जहां जेल में बंद नेताओं की सेहत हमेशा एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रही है, वहां 20 मिनट का यह ऑपरेशन आने वाले दिनों में और बड़े सियासी बवाल की वजह बन सकता है। समर्थकों की निगाहें अब उनके अगले मेडिकल बुलेटिन पर टिकी हैं।
