बाबा रामदेव vs सोशल मीडिया: दिल्ली हाईकोर्ट में ‘पर्सनालिटी राइट्स’ पर छिड़ी जंग, क्या रुकेगा अभिव्यक्ति का अधिकार?
दिल्ली हाई कोर्ट में बाबा रामदेव के व्यक्तित्व अधिकारों पर सुनवाई हुई। सोशल मीडिया कंपनियों ने रामदेव की याचिका को अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ बताया। कोर्ट ने अब रामदेव से उन लिंक्स की लिस्ट मांगी है जिन्हें वे हटवाना चाहते हैं।
- अभिव्यक्ति बनाम व्यक्तित्व अधिकार की कानूनी जंग
- सोशल मीडिया कंपनियों ने फ्री स्पीच का दिया हवाला
- पैरोडी और फैक्ट-चेक पोस्ट हटाने की मांग पर विरोध
- कोर्ट ने रामदेव से मांगी आपत्तिजनक कंटेंट की लिस्ट
नई दिल्ली: क्या एक सार्वजनिक हस्ती का अपने नाम और चेहरे पर एकाधिकार, आम जनता के व्यंग्य और आलोचना के अधिकार से बड़ा है? दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार को बाबा रामदेव की ‘व्यक्तित्व अधिकार’ (Personality Rights) याचिका पर हुई सुनवाई ने इसी कानूनी और नैतिक बहस को जन्म दे दिया है। कोर्ट में सोशल मीडिया दिग्गजों और योग गुरु के बीच तीखी बहस हुई, जिसने डिजिटल युग में निजता और फ्री स्पीच की सीमाओं पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया का कड़ा रुख: ‘कार्ल मार्क्स’ का जिक्र और अभिव्यक्ति का तर्क
एक्स (X) और मेटा (Meta) जैसी दिग्गज कंपनियों ने रामदेव की मांग का पुरजोर विरोध किया। एक्स के वकील ने अदालत में चुटकी लेते हुए कहा कि रामदेव ने जिन प्रोफाइल्स पर आपत्ति जताई है, उनमें से एक का नाम ‘कार्ल मार्क्स’ है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “जब तक खुद कार्ल मार्क्स अपने अधिकारों के लिए नहीं आते, तब तक रामदेव को संतुष्ट रहना चाहिए।”
कंपनियों का मुख्य तर्क यह है कि रामदेव की याचिका केवल व्यापारिक दुरुपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पैरोडी (व्यंग्य), फैक्ट-चेक और राजनीतिक टिप्पणियों को भी हटवाना चाहते हैं। वकीलों ने साफ कहा कि अगर पेट्रोल की कीमतों पर रामदेव के पुराने बयानों या उनके हाथी से गिरने वाले चर्चित वीडियो को हटाया गया, तो यह नागरिकों की ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का हनन होगा।
रामदेव का पक्ष: प्रतिष्ठा और डीपफेक का खतरा
रामदेव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव नायर ने दलील दी कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन वे मानहानिकारक सामग्री को संरक्षण दे रहे हैं। रामदेव का कहना है कि उनके नाम (स्वामी रामदेव, योग गुरु आदि) और उनकी विशिष्ट शैली का इस्तेमाल डीपफेक वीडियो बनाने और गलत कमर्शियल एंडोर्समेंट के लिए किया जा रहा है, जिससे उनकी दशकों की कमाई गई प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँच रहा है।
कोर्ट का दखल: अब ‘कंटेंट लिस्ट’ तय करेगी भविष्य
जस्टिस ज्योति सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने रामदेव को निर्देश दिया है कि वे उन विशिष्ट लिंक्स (URLs) की सूची सौंपें जिन्हें वे हटवाना चाहते हैं। इसके बाद सोशल मीडिया कंपनियां अपनी आपत्तियां दर्ज करेंगी। मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होनी है, जो यह तय करेगी कि डिजिटल स्पेस में ‘सेलिब्रिटी राइट्स’ की लक्ष्मण रेखा कहाँ खींची जाएगी।
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