Rajpal Yadav Case: करोड़ों के चेक बाउंस मामले में फंसे राजपाल यादव, दिल्ली हाई कोर्ट ने दिया सख्त अल्टीमेटम— ‘FD नहीं, सिर्फ DD चलेगा’

नई दिल्ली: अपनी शानदार टाइमिंग से पर्दे पर सबको हंसाने वाले राजपाल यादव के लिए कानूनी गलियारे फिलहाल तनाव भरे हैं। 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में घिरे अभिनेता को दिल्ली हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत तो दे दी है, लेकिन कोर्ट का रुख बेहद सख्त नजर आया। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने साफ लफ्जों में कह दिया कि कोर्ट में ‘दलीलें’ नहीं, सिर्फ ‘डिमांड ड्राफ्ट’ (DD) चलेगा।

FD की दलील खारिज, कोर्ट ने दिखाया सख्त रुख

मामले की सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की। उन्होंने अदालत के सामने प्रस्ताव रखा कि वे 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR) के जरिए करने को तैयार हैं। लेकिन जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने दो-टूक कहा कि भुगतान के लिए डिमांड ड्राफ्ट ही लाना होगा और इसके लिए आज ही का अल्टीमेटम भी दिया गया।

दरअसल, कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक 25 लाख और 75 लाख के डीडी पहले ही जमा किए जा चुके हैं, लेकिन बाकी बची 1.5 करोड़ की रकम पर पेंच फंसा हुआ था।

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भतीजी की शादी और अंतरिम जमानत

राजपाल यादव ने कोर्ट से 19 फरवरी को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने की इजाजत मांगी थी। कोर्ट ने मानवीय आधार पर उनकी इस अपील को स्वीकार करते हुए उन्हें 18 मार्च तक की अंतरिम जमानत दे दी है। हालांकि, यह आजादी पूरी तरह ‘कंडीशनल’ है।

हाई कोर्ट की वो 4 शर्तें, जिनका पालन है जरूरी:

कोर्ट ने राजपाल यादव को राहत देने के साथ ही एक लक्ष्मण रेखा भी खींच दी है:

  1. हाजिरी की शर्त: 18 मार्च को अगली सुनवाई पर उन्हें फिजिकली कोर्ट में पेश होना होगा। काम की व्यस्तता होने पर वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ सकते हैं।

  2. पासपोर्ट पर पहरा: अगर अभी तक पासपोर्ट सरेंडर नहीं किया है, तो उसे तुरंत जमा करना होगा।

  3. देश छोड़ने पर रोक: बिना अदालत की लिखित अनुमति के राजपाल यादव देश से बाहर कदम नहीं रख पाएंगे।

  4. बेल बॉन्ड: कोर्ट ने 1 लाख रुपये का बेल बॉन्ड और उतनी ही राशि की जमानत राशि जमा करने का आदेश दिया है।

कौन हैं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा?

इस मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा दिल्ली हाई कोर्ट की उन जजों में शुमार हैं, जो आर्थिक अपराधों और चेक बाउंस जैसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति के लिए जानी जाती हैं। क्रिमिनल लॉ और संवैधानिक मामलों पर उनकी गहरी पकड़ है। उनके फैसलों में अक्सर स्पष्टता और नियमों की सख्ती साफ झलकती है, जैसा कि इस केस में ‘DD’ की अनिवार्यता को लेकर दिखा।

अब सबकी नजरें 18 मार्च पर टिकी हैं, जब इस मामले में अगली बड़ी कानूनी हलचल देखने को मिलेगी।

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Vinod Yadav

विनोद यादव पिछले 8 साल से पत्रकारिता के साथ जुड़े है और कई बड़े समाचार पोर्टल के साथ काम किया है। ये हरियाणा से है और इनकी हरियाणा प्रदेश की ख़बरों में काफी अच्छी पकड़ है। विनोद यादव ने इसके अलावा कृषि क्षेत्र को भी काफी अच्छे से कवर किया है।