नन्हीं ‘रफ़्तार की रानी’: 8 साल की अर्शी ने ट्रैक पर रचा इतिहास, बनीं सबसे कम उम्र की नेशनल कार्टिंग चैंपियन
गुरुग्राम/फरीदाबाद: कहते हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, और इस बात को सच कर दिखाया है हरियाणा की नन्हीं जांबाज अर्शी गुप्ता ने। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से जी नहीं भर पाते, उस उम्र में अर्शी ने रफ़्तार के रोमांच को अपना जुनून बना लिया। हाल ही में संपन्न हुई ‘इंडियन नेशनल कार्टिंग चैंपियनशिप 2025’ में अर्शी ने माइक्रो मैक्स श्रेणी (8-11 वर्ष) का खिताब अपने नाम कर इतिहास रच दिया है। वह देश की सबसे कम उम्र की राष्ट्रीय कार्टिंग चैंपियन बन गई हैं।
साइकिल से शुरू हुआ रफ़्तार का सफर
अर्शी के इस सफर की नींव गुरुग्राम के सेक्टर-37 की गलियों में तब पड़ी, जब वह महज तीन साल की थीं। पिता अंचित गुप्ता बताते हैं कि अर्शी को बचपन से ही रफ़्तार का शौक था। वह अपनी नन्हीं साइकिल को इतनी तेजी से दौड़ती थीं कि साथ वाले बच्चे पीछे छूट जाते। कई बार गिरकर चोटें भी लगीं, लेकिन अर्शी के हौसले कभी पस्त नहीं हुए। दो दिन के दर्द के बाद वह फिर से अपनी साइकिल लेकर उसी जोश के साथ तैयार हो जाती थीं।
बिना किसी स्पोर्ट्स बैकग्राउंड के हासिल किया मुकाम
अर्शी का परिवार खेल की दुनिया से कोसों दूर था। पिता अंचित सोलर इंडस्ट्री में हैं और मां दीप्ति गुप्ता पेशे से डॉक्टर हैं। अंचित को फॉर्मूला वन (F1) देखने का शौक जरूर था, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी अपनी बेटी एक दिन ट्रैक पर झंडे गाड़ेगी। बेटी के भीतर छिपी इस अद्भुत क्षमता को देखते हुए अंचित ने उसे सही दिशा देने की ठानी। लंबी खोजबीन के बाद उनकी मुलाकात गुरुग्राम सेक्टर-83 (मानेसर) के कोच रोहित खन्ना से हुई, जिन्होंने अर्शी का टेस्ट लेने के बाद उसकी प्रतिभा को पहचाना।
ट्रेनिंग और नेशनल जीत का रोमांच
दिसंबर 2023 से अर्शी का असली संघर्ष शुरू हुआ। वह हफ्ते में तीन दिन फरीदाबाद से गुरुग्राम ट्रेनिंग के लिए जाती रहीं। रफ़्तार के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा था कि जनवरी 2024 में वह अभ्यास के लिए बेंगलुरु पहुंच गईं। 2025 का नेशनल सीजन अर्शी के लिए मील का पत्थर साबित हुआ, जहां उन्होंने चेन्नई और बेंगलुरु के ट्रैक पर बड़े-बड़े प्रतिस्पर्धियों को पछाड़ते हुए नेशनल ट्रॉफी अपने नाम की। आज अर्शी न केवल अपने माता-पिता, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए ‘स्पीड स्टार’ बन चुकी हैं।
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