हरियाणा की राजनीति में ‘फरीदाबाद गुट’ की दिल्ली दस्तक: कृष्णपाल गुज्जर के किले में बड़ी सेंध?
हरियाणा के तीन मंत्रियों विपुल गोयल, राजेश नागर और गौरव गौतम की दिल्ली में नितिन नवीन से मुलाकात ने फरीदाबाद की सियासत में हलचल तेज कर दी है। इसे केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुज्जर के खिलाफ एक नए और एकजुट नेतृत्व के उदय के रूप में देखा जा रहा है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट -
- दिल्ली में मंत्रियों की गुप्त मंत्रणा
- कृष्णपाल गुज्जर को सीधी चुनौती?
- फरीदाबाद का बदला राजनीतिक समीकरण
- संगठनात्मक नियुक्तियों पर दावेदारी
नई दिल्ली/चंडीगढ़: हरियाणा की सियासत में इन दिनों कड़ाके की ठंड के बीच राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। मामला फरीदाबाद की ‘लोकल’ खींचतान का है, जो अब देश की राजधानी दिल्ली की दहलीज तक जा पहुंचा है। हाल ही में हरियाणा कैबिनेट के तीन कद्दावर चेहरों—विपुल गोयल, राजेश नागर और गौरव गौतम—की भाजपा के राष्ट्रीय संगठन के रणनीतिकारों (नितिन नवीन) से हुई मुलाकात ने सूबे में नई चर्चा छेड़ दी है।
कैमरों के सामने तो इसे ‘शिष्टाचार भेंट‘ का नाम देकर औपचारिकता की चादर ओढ़ा दी गई, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही इशारा कर रही है। राजनीतिक विश्लेषक इसे फरीदाबाद की राजनीति में ‘सत्ता के विकेंद्रीकरण’ की कोशिश मान रहे हैं।
पुराना किला और नए सिपहसालार
फरीदाबाद की राजनीति में दशकों से केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुज्जर का निर्विवाद दबदबा रहा है। लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई है। एक साथ तीन मंत्रियों का दिल्ली दरबार में हाजिरी लगाना यह साफ करता है कि अब फरीदाबाद में ‘एकछत्र राज’ को चुनौती देने के लिए एक नया और एकजुट मोर्चा तैयार हो चुका है।
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यह मुलाकात महज मुलाकात नहीं, बल्कि संगठन को दिया गया एक ठोस संदेश है कि फरीदाबाद का नेतृत्व अब किसी एक व्यक्ति की परिक्रमा तक सीमित नहीं रहेगा। ये तीनों नेता सीधे केंद्रीय नेतृत्व से संवाद साधकर यह जताना चाहते हैं कि प्रदेश की कैबिनेट में उनकी हैसियत अब फरीदाबाद के समीकरणों को अपने दम पर मोड़ने की है।
संगठन पर कब्जे की ‘सायलेंट’ जंग
सूत्रों की मानें तो इस गुपचुप बैठक का असली एजेंडा आगामी संगठनात्मक नियुक्तियां हैं। फरीदाबाद क्षेत्र में जिला स्तर से लेकर मंडल स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए ये तिकड़ी अब सीधे दिल्ली से अपनी गोटियां फिट कर रही है। मंशा साफ है—संगठन में अपने समर्थकों को जगह दिलाना और कृष्णपाल गुज्जर के प्रभाव को सीमित करना।
यह ‘भीतरी खींचतान’ आने वाले समय में हरियाणा भाजपा के लिए सिरदर्द बनेगी या शक्ति संतुलन का नया जरिया, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि फरीदाबाद की सियासत में अब ‘गुज्जर बनाम बाकी’ वाली जंग और भी दिलचस्प होने वाली है।
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