मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट? ट्रम्प ने ईरान सीमा पर तैनात किए 50 फाइटर जेट्स, ‘एरो’ ऑपरेशन से दहल सकती है तेहरान की धरती
मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर! डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की घेराबंदी के लिए 50 फाइटर जेट्स तैनात किए हैं। परमाणु डील पर अनिश्चितता के बीच अमेरिका और इज़रायल एक बड़े साझा सैन्य ऑपरेशन की तैयारी में हैं, जो हफ्तों तक चल सकता है। युद्ध की आहट तेज।
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट का नक्शा एक बार फिर बारूद की गंध से भरने वाला है। वॉशिंगटन से लेकर तेहरान तक, कूटनीति की मेज अब धीरे-धीरे वॉर-रूम में तब्दील होती दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं—या तो तेहरान झुकेगा, या फिर परिणाम भुगतेगा।
बीते 24 घंटों में जिस तरह से अमेरिका ने ईरान की सीमाओं के करीब 50 से अधिक अत्याधुनिक फाइटर जेट्स और नौसैनिक बेड़े की तैनाती की है, उसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों के माथे पर बल ला दिए हैं।
बातचीत की मेज पर ‘शर्तें’ और आसमान में ‘लड़ाकू विमान’
भले ही पर्दे के पीछे जिनेवा में बातचीत चल रही हो, लेकिन जमीन पर तनाव चरम पर है। ट्रम्प के खास सिपहसालार जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ घंटों माथापच्ची की, लेकिन नतीजा सिफर ही नजर आ रहा है।
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अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट कर दिया है कि ट्रम्प ने अपनी ‘रेड लाइन्स’ खींच दी हैं। अमेरिका अब किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु शक्ति बनते नहीं देखना चाहता।
‘एक्सियोस’ का सनसनीखेज दावा: हफ्तों चलेगा सैन्य ऑपरेशन
अमेरिकी समाचार वेबसाइट ‘एक्सियोस’ की एक रिपोर्ट ने आग में घी डालने का काम किया है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन किसी छोटे हमले की नहीं, बल्कि एक ‘महायुद्ध’ की तैयारी में है।
यह ऑपरेशन इतना बड़ा हो सकता है जिसकी कल्पना शायद आम अमेरिकियों ने भी नहीं की होगी।
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दावा है कि अमेरिकी सेना और इज़रायल मिलकर ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकानों को जमींदोज करने के लिए हफ्तों लंबा ऑपरेशन चला सकते हैं।
खामेनेई की चुनौती और ट्रम्प का सख्त लहजा
उधर तेहरान में भी सन्नाटा नहीं है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी अमेरिका को ‘मुंहतोड़ जवाब’ देने की चेतावनी दी है। लेकिन ट्रम्प का पिछला रिकॉर्ड देखते हुए ईरान की चिंताएं जायज हैं।
पिछले साल भी अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया था, और इस बार तैयारी उससे कहीं अधिक विनाशकारी लग रही है।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस संभावित सैन्य हस्तक्षेप पर अमेरिकी संसद या जनता के बीच कोई बड़ी चर्चा नहीं हो रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि व्हाइट हाउस इस बार ‘सरप्राइज अटैक’ की रणनीति पर काम कर रहा है।
अगर परमाणु समझौता विफल होता है, तो मिडिल ईस्ट में दशकों का सबसे बड़ा संघर्ष छिड़ना लगभग तय है।
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