हरियाणा के सरकारी स्कूलों और जिला शिक्षा कार्यालयों में पिछले काफी समय से जिस प्रशासनिक बदलाव की सुगबुगाहट थी, उस पर अब आधिकारिक मुहर लग गई है। शिक्षा निदेशालय ने एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश के 50 खंड शिक्षा अधिकारियों यानी बीईओ को प्रमोट कर दिया है। अब ये अधिकारी डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी (डिप्टी डीईओ) के रूप में नई और बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे। इस फैसले को केवल एक रूटीन तबादला या प्रमोशन कहना गलत होगा, क्योंकि यह सीधे तौर पर जिलों में शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला फैसला है।

देखा जाए तो विभाग के गलियारों में इस लिस्ट का इंतजार काफी समय से हो रहा था। कई जिलों में अधिकारियों की कमी की वजह से कामकाज की रफ्तार धीमी पड़ रही थी, लेकिन अब इन नियुक्तियों के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक काम में तेजी आएगी। निदेशालय की ओर से जारी आदेशों के तुरंत बाद इन अधिकारियों को अपनी नई कुर्सियां संभालने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी दे दिए गए हैं।

प्रशासनिक ढांचे को मिलेगी नई मजबूती

अक्सर देखा जाता है कि जिलों में शिक्षा विभाग के पास काम का बोझ इतना ज्यादा होता है कि अकेले जिला शिक्षा अधिकारी के लिए हर स्कूल और हर ब्लॉक पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में 50 नए डिप्टी डीईओ के आने से काम का बंटवारा बेहतर तरीके से हो सकेगा। विभागीय सूत्रों की मानें तो यह पदोन्नति काफी समय से अटकी हुई थी, जिसे अब हरी झंडी दी गई है। यह कदम न केवल अधिकारियों का मनोबल बढ़ाएगा, बल्कि स्कूलों में चल रही योजनाओं के क्रियान्वयन में भी पारदर्शिता लाएगा।

जब एक अनुभवी खंड शिक्षा अधिकारी प्रमोट होकर जिला स्तर पर आता है, तो उसे अपनी जमीन और अपने इलाके की चुनौतियों का पूरा पता होता है। यही अनुभव अब पूरे जिले की शिक्षा नीति को लागू करने में काम आएगा।

प्रिंसिपलों के लिए भी आने वाली है खुशखबरी

खबर सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। उन लोगों के लिए भी विभाग से अच्छे संकेत मिल रहे हैं जो लंबे समय से प्रमोशन की कतार में खड़े हैं। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि शिक्षा विभाग बहुत जल्द 89 प्रधानाचार्यों (प्रिंसिपल्स) की पदोन्नति सूची जारी करने की तैयारी में है। इन प्रधानाचार्यों को अब खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) के पदों पर तैनात किया जाएगा।

इसका मतलब साफ है कि विभाग नीचे से लेकर ऊपर तक के प्रशासनिक ढांचे को भरने की कोशिश कर रहा है। प्रिंसिपलों का बीईओ बनना इस लिहाज से अहम है क्योंकि उन्हें स्कूल मैनेजमेंट का सीधा अनुभव होता है। जब वे ब्लॉक का जिम्मा संभालेंगे, तो स्कूलों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान और बेहतर तरीके से हो पाएगा। कुल मिलाकर, हरियाणा शिक्षा विभाग इस समय पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में नजर आ रहा है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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