दुनिया के नक्शे पर इस वक्त जबरदस्त खलबली मची है। अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को जिस तरह हिरासत में लिया है, उसने पूरी दुनिया की राजनीति में एक ऐसा भूचाल ला दिया है जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। यह कोई मामूली गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि एक ऐसा कदम है जिसने महाशक्तियों को आमने-सामने लाकर खड़ा कर दिया है।

इस पूरी घटना पर सबसे तीखी और खतरनाक प्रतिक्रिया उत्तर कोरिया से आई है। वहां के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन ने इसे सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध का न्योता करार दिया है। किम ने मादुरो को अपना पक्का दोस्त बताते हुए अमेरिका को दो-टूक लहजे में चेतावनी दी है। उत्तर कोरिया का कहना है कि अगर मादुरो की स्थिति जल्द साफ नहीं की गई और उन्हें बिना शर्त रिहा नहीं किया गया, तो इसके नतीजे पूरी दुनिया को भुगतने होंगे। किम की इस दहाड़ ने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में दहशत पैदा कर दी है।

रूस का सख्त रुख और बातचीत की अपील

दूसरी तरफ रूस भी इस मामले में पीछे नहीं है। मॉस्को ने अमेरिका की इस कार्रवाई को वेनेजुएला के खिलाफ ‘सशस्त्र आक्रामकता’ बताया है। रूसी विदेश मंत्रालय का मानना है कि अमेरिका ने जो भी तर्क दिए हैं, वे पूरी तरह खोखले और बेबुनियाद हैं। रूस का कहना है कि यह कूटनीति नहीं बल्कि पुरानी वैचारिक दुश्मनी निकालने का एक तरीका है। हालांकि रूस ने थोड़ा संयम बरतने की बात भी कही है और दुनिया से अपील की है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत का रास्ता चुना जाए।

नार्को-टेररिज्म के गंभीर आरोपों में घिरे मादुरो

इधर अमेरिका के भीतर कानूनी शिकंजा पूरी तरह कस चुका है। अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी ने साफ कर दिया है कि निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी पर न्यूयॉर्क के साउदर्न डिस्ट्रिक्ट में बेहद संगीन आरोप तय किए गए हैं। इन आरोपों की फेहरिस्त काफी लंबी और डरावनी है।

उन पर नार्को-टेररिज्म की साजिश रचने से लेकर कोकीन की तस्करी और खतरनाक हथियारों के अवैध जखीरे रखने जैसे आरोप लगाए गए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि यह पूरी कानूनी प्रक्रिया उस वक्त शुरू हुई जब अमेरिका ने कराकस में एयरस्ट्राइक की थी। अमेरिका की दलील है कि मादुरो की सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नशीले पदार्थों के कारोबार को बढ़ावा दे रही थी और अमेरिका के खिलाफ साजिशें रच रही थी।

आम जनता और भविष्य की चिंता

वेनेजुएला की सड़कों से लेकर संयुक्त राष्ट्र के दफ्तरों तक इस वक्त सिर्फ एक ही चर्चा है कि आगे क्या होगा? क्या यह तनाव वाकई में किसी बड़े युद्ध की शक्ल ले लेगा या फिर बातचीत के जरिए कोई बीच का रास्ता निकलेगा? एक तरफ अमेरिका अपनी सुरक्षा और कानून की दुहाई दे रहा है, तो दूसरी तरफ उत्तर कोरिया और रूस जैसे देश इसे संप्रभुता का उल्लंघन मान रहे हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अब अगले कुछ घंटों की गतिविधियों पर टिकी हैं, क्योंकि एक गलत कदम भी विश्व शांति के लिए घातक साबित हो सकता है।

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