नई दिल्ली। भारत और पोलैंड के बीच सांस्कृतिक संबंधों और युवा संपर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित जमसाहेब स्मारक युवा विनिमय कार्यक्रम का दूसरा संस्करण 7 से 14 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया गया। इस दौरान पोलैंड के 19 सदस्यीय युवा प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात, महाराष्ट्र और नई दिल्ली का दौरा किया। कार्यक्रम में प्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक स्मारकों का भ्रमण किया और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर तथा केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया से मुलाकात की।
इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य पोलैंड के युवाओं को भारत के इतिहास, संस्कृति, संस्थानों और समकालीन विकास से परिचित कराना था। कार्यक्रम के दौरान दोनों देशों के साझा इतिहास और द्विपक्षीय संबंधों में युवा आदान-प्रदान की भूमिका पर भी जोर दिया गया।
द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ा है कार्यक्रम का इतिहास
कार्यक्रम का एक प्रमुख पड़ाव गुजरात के जामनगर स्थित बालाचड़ी पोलैंड बाल शिविर स्मारक रहा। यह स्मारक महाराजा जाम साहब दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा के मानवीय योगदान की याद दिलाता है।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान महाराजा जाम साहब ने युद्ध के कारण विस्थापित हुए पोलिश बच्चों को शरण, शिक्षा और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई थी। उनके इस योगदान के कारण पोलैंड में उन्हें 'दोबरी महाराजा' यानी 'नेक महाराजा' के नाम से सम्मान के साथ याद किया जाता है।
प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित वालिवडे पोलैंड शरणार्थी शिविर स्मारक का भी दौरा किया। यह स्थल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान और उसके बाद पोलैंड के हजारों शरणार्थियों को भारत में मिली शरण की याद दिलाता है।
इन दोनों स्थलों के भ्रमण के जरिए प्रतिनिधिमंडल को भारत और पोलैंड के संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा उस दौर में भारत की मानवीय सहायता के बारे में जानने का अवसर मिला।
विदेश मंत्री और केंद्रीय मंत्री से की बातचीत
नई दिल्ली में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने पोलैंड के युवा प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की। रात्रिभोज के दौरान हुई बातचीत में युवाओं को भारत में युवा विकास और भागीदारी से जुड़े दृष्टिकोण पर विचार साझा करने का अवसर मिला।
प्रतिनिधिमंडल ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी मुलाकात की। इस दौरान भारत-पोलैंड संबंधों और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने में युवा आदान-प्रदान की भूमिका पर चर्चा हुई।
गांधी से जुड़े स्थलों को भी देखा
सात दिनों की यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने गुजरात के गांधीनगर स्थित दांडी कुटीर और महात्मा गांधी की जन्मभूमि पोरबंदर में कीर्ति मंदिर का भी दौरा किया। इन यात्राओं के माध्यम से पोलैंड के युवाओं ने भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जाना।
प्रतिनिधिमंडल ने यात्रा के दौरान मिले आतिथ्य के लिए आभार जताया। उनके अनुसार, इस अनुभव से भारत के इतिहास और संस्कृति के बारे में उनकी समझ बढ़ी और देश के साथ उनका जुड़ाव मजबूत हुआ।
भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है कार्यक्रम
जमसाहेब स्मारक युवा विनिमय कार्यक्रम की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2024 में पोलैंड की राजकीय यात्रा के दौरान की थी। यह भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी के लिए 2024-2028 की पंचवर्षीय कार्य योजना का हिस्सा है।
इसके तहत पोलैंड के युवाओं का भारत में वार्षिक आदान-प्रदान आयोजित किया जाता है। कार्यक्रम के जरिए प्रतिभागियों को भारत के इतिहास, संस्कृति, संस्थानों और मौजूदा विकास से परिचित कराया जाता है।
कार्यक्रम का दूसरा संस्करण पूरा होने के साथ दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया गया।
