शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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भगवंत मान के पेरिस दौरे पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: केंद्र की सुरक्षा चिंताओं के बीच मिली मंजूरी, जानिए पूरा विवाद

पंजाब के सीएम भगवंत मान की फ्रांस यात्रा को हाईकोर्ट से मंजूरी मिल गई है। केंद्र द्वारा खालिस्तानी खतरे व सुरक्षा कारणों से लगाई गई रोक के खिलाफ पंजाब सरकार ने याचिका दायर की थी। जानें इस पूरे कानूनी व राजनीतिक विवाद के मुख्य पहलू।

भगवंत मान के पेरिस दौरे पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
भगवंत मान के पेरिस दौरे पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
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चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के पेरिस दौरे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच उपजा प्रशासनिक व राजनीतिक गतिरोध अब एक नए मोड़ पर पहुँच गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए मुख्यमंत्री मान को फ्रांस जाने की हरी झंडी दे दी है। हालांकि कोर्ट के इस निर्देश के साथ ही मुख्यमंत्री की विदेश सुरक्षा, खालिस्तानी धमकियों और राजनीतिक मंजूरियों से जुड़े गंभीर प्रशासनिक सवाल एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

सुरक्षा की चिंता बनाम विदेश दौरा: अदालत में तर्कों की जंग

अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार मेले (Food Trade Fair) में हिस्सा लेने के लिए सीएम भगवंत मान के प्रस्तावित पेरिस दौरे पर केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राजनीतिक मंजूरी (Political Clearance) रोक दी थी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकीलों ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार के गृह विभाग की ओर से ही हाल ही में भेजे गए एक पत्र में मुख्यमंत्री को देश-विदेश में सक्रिय खालिस्तानी तत्वों - विशेषकर गुरपतवंत सिंह पन्नू और उसके नेटवर्क से गंभीर खतरे की बात स्वीकार की गई थी।

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केंद्र की ओर से दलील दी गई कि चूंकि यह कोई आधिकारिक राजकीय निमंत्रण (Formal State Visit) नहीं है इसलिए फ्रांस में भारत के राजनयिक मिशन और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मुख्यमंत्री स्तर का वीवीआईपी प्रोटोकॉल तय करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। मेले में होने वाली भारी जनसभा और अप्रत्याशित भीड़ को देखते हुए किसी भी अप्रिय घटना का जोखिम नहीं लिया जा सकता।

पंजाब सरकार का पलटवार: 'सुरक्षा की आड़ में पक्षपात का आरोप'

दूसरी ओर पंजाब सरकार के विधि अधिकारियों ने केंद्र की दलीलों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित बताया। राज्य सरकार का तर्क था कि भारत सरकार का दायित्व केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि विदेश जाने वाले हर संवैधानिक पदधारक की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जिस तरह भारत दौरे पर आने वाले विदेशी प्रतिनिधियों को प्रोटोकॉल दिया जाता है, उसी तर्ज पर विदेश मंत्रालय (MEA) फ्रांस सरकार के साथ समन्वय बनाकर पर्याप्त सुरक्षा घेरा तैयार करवा सकता है।

पंजाब सरकार ने अदालत के समक्ष यह रिकॉर्ड भी रखा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान इससे पहले भी जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की सफल यात्राएं कर चुके हैं। तब सुरक्षा चिंताओं के बावजूद राजनीतिक मंजूरी दी गई थी, तो फ्रांस दौरे के समय अचानक यह दोहरा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है?

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हाईकोर्ट का निर्णय और भावी असर

दोनों पक्षों की मैराथन दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री को यात्रा की अनुमति तो दे दी है, लेकिन इस फैसले से उठे प्रशासनिक सवाल अभी शांत नहीं हुए हैं। अदालत द्वारा विस्तृत आदेश जारी होना अभी बाकी है, लेकिन इस फैसले के बाद अब गेंद केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के पाले में है कि वे पेरिस में मुख्यमंत्री मान की सुरक्षा व्यवस्था और राजनयिक प्रोटोकॉल को किस तरह तय करते हैं।

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