पलवल: जब इरादे मजबूत हों और सही वक्त पर प्रशासनिक योजनाओं का हाथ मिल जाए, तो सीमित संसाधन भी सपनों की राह में रोड़ा नहीं बन सकते। हरियाणा के पलवल जिले के गांव घाघोट के मोहम्मद साद की कहानी इस बात की जीती-जागती मिसाल बनकर सामने आई है। आर्थिक चुनौतियों से जूझते हुए साद ने न केवल खुद को संभाला, बल्कि अपनी लगन और राज्य सरकार के 'मेरिट मिशन' (Merit Mission) के बूते पंचायत सचिव (Gram Sachiv) के प्रतिष्ठित पद पर चयनित होकर युवाओं के सामने एक नई नजीर पेश की है।
साल 2022 में स्नातक (Graduation) पूरा करने के बाद साद का लक्ष्य स्पष्ट था—सरकारी सेवा में शामिल होकर परिवार और भविष्य को सुरक्षित करना। लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Examinations) की तैयारी के दौरान सबसे बड़ी बाधा आर्थिक आत्मनिर्भरता की कमी थी। कोचिंग, किताबों और रोजमर्रा के खर्चों का दबाव युवाओं के मनोबल को अक्सर तोड़ देता है, और साद भी इसी दौर से गुजर रहे थे।
ऐसे मोड़ पर राज्य सरकार की 'सक्षम योजना' (Saksham Yojana) उनके लिए संजीवनी साबित हुई। साद ने योजना में पंजीकरण (Registration) कराया, जिसके बाद मिलने वाले बेरोजगारी भत्ते (Unemployment Allowance) और तय मानदेय (Honorarium) ने उनके खर्चों की भरपाई की। साद बताते हैं कि इस वित्तीय सहयोग ने न केवल उनकी जरूरतों को पूरा किया, बल्कि भविष्य की अनिश्चितता से उपजे मानसिक तनाव (Mental Stress) को भी दूर कर दिया।
चिंताओं से मुक्त होकर साद ने पूरी ऊर्जा पढ़ाई में झोंक दी। लगातार मेहनत और स्पष्ट रणनीति के चलते अंततः उनका चयन मेरिट के आधार पर ग्राम सचिव पद के लिए हो गया। अपनी इस कामयाबी पर साद ने हरियाणा सरकार की कल्याणकारी नीतियों का आभार जताते हुए कहा कि यदि युवाओं को संघर्ष के समय उचित मंच और आर्थिक सुरक्षा (Financial Security) मिले, तो वे असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल कर सकते हैं।






