शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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Haryana News: मूक-बधिर बच्चों के हुनर को देख गदगद हुए मानवाधिकार आयोग के जज, जानिए ग्राउंड इंस्पेक्शन में क्या मिला

हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने गुरुग्राम स्थित वेलफेयर सेंटर फॉर पर्सन्स विद स्पीच एंड हियरिंग इम्पेयरमेंट का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान 259 विशेष विद्यार्थियों के पुनर्वास, छात्रावास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और उनकी मूलभूत सुविधाओं का जायजा लेकर व्यवस्थाओं को परखा गया।

मूक-बधिर बच्चों के हुनर को देख गदगद हुए मानवाधिकार आयोग के जज
मूक-बधिर बच्चों के हुनर को देख गदगद हुए मानवाधिकार आयोग के जज
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गुरुग्राम: मूक-बधिर बच्चों के अधिकारों, शिक्षा और जीवन परिस्थितियों की हकीकत जानने के लिए हरियाणा मानवाधिकार आयोग (Haryana Human Rights Commission - HHRC) ने गुरुग्राम में एक महत्वपूर्ण जमीनी निरीक्षण (Ground Inspection) किया। आयोग के न्यायिक सदस्य (Judicial Member) कुलदीप जैन शनिवार को सेक्टर-15 पार्ट-II स्थित 'वेलफेयर सेंटर फॉर पर्सन्स विद स्पीच एंड हियरिंग इम्पेयरमेंट' पहुंचे। यहां उन्होंने हॉस्टल से लेकर क्लासरूम और वोकेशनल वर्कशॉप तक हर व्यवस्था का बारीकी से मुआयना किया।

निरीक्षण के दौरान केंद्र की सहायक निदेशक (Assistant Director) नविता ने आयोग को संस्थान के ढांचे और गतिविधियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1971 से कार्यरत यह केंद्र हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE) से संबद्ध है, जहां वर्तमान में 259 विशेष बच्चे (95 छात्राएं और 164 छात्र) नामांकित हैं। परिसर में बने अलग-अलग हॉस्टलों में 102 छात्र-छात्राएं रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। यहां बच्चों को भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language - ISL) के जरिए दसवीं कक्षा तक शिक्षित किया जा रहा है, साथ ही आधुनिक कंप्यूटर लैब और परामर्श (Counselling) की सुविधा भी दी जा रही है।

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आयोग के सदस्य ने विशेष रूप से बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने वाली आजीविका इकाइयों का रुख किया। केंद्र में पारंपरिक शिक्षा के अलावा छात्रों को आईटीआई (ITI) के फिटर और वेल्डर ट्रेड के साथ-साथ सिलाई और कढ़ाई जैसी रोजगारोन्मुखी ट्रेनिंग (Skill Development) दी जा रही है, ताकि वे भविष्य में किसी पर निर्भर न रहें।

निरीक्षण के दौरान सबसे अधिक ध्यान इन बच्चों की खेल प्रतिभा ने खींचा। केंद्र के खिलाड़ियों ने नौवें हरियाणा राज्य खेलों में 54 पदक और गुजरात में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में 4 पदक जीतकर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है। बैडमिंटन, टेबल टेनिस, जूडो और एथलेटिक्स में बच्चों के प्रदर्शन की न्यायिक सदस्य ने जमकर सराहना की।

आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने इस दौरे के संदर्भ में स्पष्ट किया कि आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाक् एवं श्रवण बाधित विद्यार्थियों को सम्मानजनक वातावरण (Dignified Environment), समान अवसर और सुरक्षित माहौल मिले। उन्होंने कहा कि आयोग ऐसे निरीक्षणों के जरिए यह सुनिश्चित करता है कि दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास (Rehabilitation) और कल्याण में कोई प्रशासनिक कमी न रहे।

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