पलवल: सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे बिना यदि जनकल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) का सीधा लाभ और कानूनी अधिकारों की मुफ्त सलाह एक ही जगह मिल जाए, तो इससे आमजन को बड़ी राहत मिलती है। इसी जनहितैषी विजन (Public Welfare Vision) के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (District Legal Services Authority - DLSA), पलवल आगामी 28 अक्टूबर को शहर के कैंप कॉलोनी स्थित पंचायत भवन (पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के निकट) में एक बड़े स्तर पर 'मेगा विधिक सेवा-सह-जागरूकता शिविर' आयोजित करने जा रहा है।
प्रातः 11 बजे से शुरू होने वाले इस विशेष कैंप का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े पात्र लाभार्थियों (Eligible Beneficiaries) तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करना और जरूरतमंदों को मुफ्त कानूनी सहायता (Free Legal Aid) उपलब्ध कराना है।
एक मंच पर 25 से ज्यादा सरकारी महकमे
प्रशासनिक अमले को सीधे जनता से जोड़ने के लिए इस शिविर का दायरा बेहद व्यापक रखा गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (Chief Judicial Magistrate - CJM) हरीश गोयल के अनुसार, शिविर में 25 से अधिक प्रमुख विभाग मौके पर ही अपनी सेवाएं और परामर्श देंगे।
शिविर में शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, कृषि व बागवानी विभाग, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN), खाद्य एवं आपूर्ति, श्रम कल्याण बोर्ड, महिला एवं बाल विकास, बैंकिंग सेक्टर, रोजगार विभाग और आयुष विभाग के स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके अलावा आधुनिक अपराधों से सुरक्षा के लिए साइबर अपराध प्रकोष्ठ (Cyber Crime Cell), कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), वन स्टॉप सेंटर और रेडक्रॉस सोसायटी की टीमें भी जनता की समस्याओं का निवारण करेंगी।
पात्रता से लेकर ऑन-द-स्पॉट मार्गदर्शन
सीजेएम हरीश गोयल ने स्पष्ट किया कि अक्सर जागरूकता की कमी या जटिल प्रक्रिया की वजह से गरीब और ग्रामीण तबका कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाता है। इस शिविर में न सिर्फ योजनाओं की पात्रता (Eligibility Criteria) और आवेदन प्रक्रिया (Application Process) की बारीकियां समझाई जाएंगी, बल्कि दस्तावेजों की जांच कर पात्र लोगों को लाभ दिलाने में सीधी मदद की जाएगी।
इस पूरे अभियान को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन और गैर-सरकारी संगठन (Non-Governmental Organizations - NGOs) भी अपनी भागीदारी निभाएंगे, जिससे दूर-दराज के जरूरतमंदों को उनके विधिक और नागरिक अधिकारों (Legal and Civil Rights) के प्रति जागरूक किया जा सके।






