गेहूं की सिंचाई और खाद प्रबंधन का आसान तरीका: पहली सिंचाई कब और कैसे करें?
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Farmer News: गेहूं की खेती में पहला पानी देने का सही समय और खाद का प्रबंधन करते समय कई किसान उलझन में रहते हैं। लेकिन अगर इन दोनों बातों का ध्यान सही तरीके से रखा जाए तो पूरी फसल मौसम के अनुसार बिना किसी परेशानी के अच्छी पैदावार देती है।
सबसे पहले बात करते हैं पहला पानी देने की। इसे पहला सिंचाई या कहौनी पानी भी कहा जाता है। यह सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद देनी चाहिए। क्योंकि इसी समय पौधों की जड़ें फैलने लगती हैं और यदि इस समय नमी कम होगी तो पौधे कमजोर रहेंगे और कंसे (टिलर) कम बनेंगे। पानी देते समय मिट्टी हल्की नमी में होनी चाहिए, बहुत सूखी हो तो हल्की सिंचाई पहले करें। तेज पानी देने से मिट्टी कट सकती है और बीज उखड़ सकते हैं। सिंचाई धीरे-धीरे नाली और पट्टी के हिसाब से दें ताकि छोटे पौधे गिरें नहीं।
खास बात यह है कि ठंडे मौसम में सुबह-सुबह सिंचाई कभी न करें क्योंकि ठंडा पानी जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे मौसम में दोपहर का समय अच्छा रहेगा। सिंचाई से पहले खेत की घास-फूस साफ कर लें क्योंकि खरपतवार पानी के बाद तेजी से बढ़ते हैं और पौधों से पोषक तत्व छीन लेते हैं।
अब खाद प्रबंधन की बात करें तो बुवाई के समय डीएपी (फॉस्फोरस वाला) 1 बोरी प्रति एकड़, पोटाश 8-10 किलोग्राम, और जिंक सल्फेट 5 किलोग्राम प्रति एकड़ डालना महत्वपूर्ण है। इससे जड़ें मजबूत होती हैं और पौधा बीमारियों से बचता है। पहला पानी देते समय यूरिया 25-30 किलो प्रति एकड़ देना चाहिए क्योंकि पौधा इस समय तेजी से बढ़ता है और नाइट्रोजन की ज्यादा जरूरत होती है। दूसरी सिंचाई (45-50 दिन) के समय 20-25 किलो यूरिया देना फसल के संतुलित विकास के लिए जरूरी है। साथ ही 20-25 किलो बेंटोनाइट सल्फर डालने से दाने अच्छे भरते हैं और रोग भी कम लगते हैं।
पैदावार बढ़ाने के लिए फूल निकलने के बाद पत्तों पर 2% यूरिया का स्प्रे करना फायदेमंद है। अगर पौधों में जिंक या बोरोन की कमी हो तो उनका स्प्रे भी करें। सिंचाई की योजना के अनुसार पहली सिंचाई 20-25 दिन, दूसरी 45-50 दिन, तीसरी 65-70 दिन, चौथी 85-90 दिन करनी होती है। ठंडे इलाकों में कभी-कभी तीन सिंचाइयां भी पर्याप्त होती हैं जबकि गर्म इलाकों में 4-5 बार पानी देना बेहतर रहता है।
अगर किसान इन बातों का ध्यान रखें तो वे बालियों की संख्या बढ़ा सकते हैं, दाने भरपूर कर सकते हैं और कुल मिलाकर उपज में बढ़ोतरी देख सकते हैं। सिंचाई और खाद प्रबंधन के सही सामंजस्य से फसल मजबूत, स्वस्थ और रोगमुक्त होती है, जिससे मुनाफा भी बढ़ता है।
इसलिए गेहूं की खेती में पहला सिंचाई और खाद का सही प्रबंधन सर्वोपरि है जिसके बिना अच्छी पैदावार की उम्मीद नहीं की जा सकती। सभी किसान भाई इस खबर में दी गई जानकारी के हिसाब से कार्य करके अपनी फसल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बढ़ा सकते हैं। किसान भाइयों उम्मीद है की आप सभी को विराट भारत के जरिये दी गई ये जानकारी काफी अच्छी लगी होगी।
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