तमिलनाडु में सबसे बड़ी ड्रग हंट! जेल के अंदर से चल रहा था इंटरनेशनल रैकेट, दिल्ली–मुंबई तक फैला जाल
पुलिस लगातार ऐसे अपराधियों पर नज़र रख रही थी जो बार-बार यही काम करते थे और हाल ही में जेल से छूटे थे। लक्ष्य था – तमिलनाडु में चल रहे इंटर-स्टेट और इंटरनेशनल कार्टेल को खत्म करना।
प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स तक पहुंचती थी MDMA, मेथ (meth) और कोकीन
आरोप है कि यह नेटवर्क तमिलनाडु में प्रोफेशनल्स और कॉलेज स्टूडेंट्स के बीच मेथामफेटामाइन (methamphetamine), MDMA और कोकीन सप्लाई करता था। दिल्ली में 10 दिन की कार्रवाई के बाद पुलिस ने बताया कि तमिलनाडु के ड्रग पेडलर्स दिल्ली में रहने वाले एक किंगपिन (मुख्य सरगना) से जुड़े थे। पेमेंट पश्चिम बंगाल, नागालैंड और मिज़ोरम के बैंक खातों के ज़रिए होती थी।
जांच में यह भी पता चला कि कार्टेल का एक हिस्सा चेन्नई के पास पुझल जेल से ऑपरेट होता था, जहाँ विदेशी कैदी लोकल आरोपियों को निर्देश देते थे।
अक्टूबर में भी हुई थी गिरफ्तारियां
अक्टूबर 2025 की शुरुआत में दो आरोपी दबोचे थे जिसके पास 55 ग्राम मेथ बरामद हुई थी। ऑपरेशन की शुरुआत अक्टूबर 2025 में तब हुई जब पुलिस ने मुनीर (28) और जावीद (38) को 55 ग्राम मेथामफेटामाइन के साथ गिरफ्तार किया।
IG असरा गर्ग ने SP विवेकानंद शुक्ला और 15+ पुलिस अधिकारियों की एक स्पेशल टीम बनाई जो बार-बार अपराध करने वालों को ट्रैक कर रही थी।
तिरुवल्लूर में NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज कर दोनों को जेल भेजा गया। एक अधिकारी के मुताबिक आरोपियों में से एक अक्सर मुंबई जाता था और धारावी से ड्रग्स खरीदकर चेन्नई और बेंगलुरु में सप्लाई करता था।
Instagram इन्फ्लुएंसर गिरफ़्तार, लैब-मटीरियल बरामद
इन्हीं सुरागों पर 23 अक्टूबर को पुलिस ने 22 साल के डांसर और इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर सिबिराज को पकड़ा। उसके पास से 54 ग्राम मेथ, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, पैकेजिंग मटीरियल और लैब इक्विपमेंट (lab equipment) भी मिला।
उससे पूछताछ में एक विदेशी सप्लायर का लिंक मिला।
5 दिन में पहला विदेशी सप्लायर पकड़ा
28 अक्टूबर को पुलिस ने माइकल नवासाह ननमदी (43) को गिरफ्तार किया जो नाइजीरिया का रहने वाला था और नमक्कल में टेक्सटाइल बिज़नेस चलाता था।
उसके पास से 7 मोबाइल फोन, लैपटॉप, 2 पासपोर्ट, सैकड़ों प्रकार की दवाएं, 39 ग्राम संदिग्ध सफेद क्रिस्टल बरामद हुआ। अगले दिन चेन्नई में रहने वाले कांगो (Congo) के नागरिक काफ़िता यानिक शिम्बोम्बो (36) को भी पकड़ लिया गया।
GPS लोकेशन से ‘ड्रग पिकअप पॉइंट्स’ बनाये थे
कार्टेल का तरीका बेहद मॉडर्न था। पेमेंट कन्फर्म होते ही विदेशी नंबरों से खरीदारों को GPS कोऑर्डिनेट्स (location points) भेजे जाते थे—ज्यादातर चेन्नई और बेंगलुरु में—जहां ड्रग्स पहले से छुपाकर रखी होती थीं।
खरीदार बिना किसी सीधे संपर्क के पैकेट उठा लेते थे। अधिकारीयों के अनुसार कार्टेल मल्टी-लेयर सिस्टम पर चलता था। सप्लाई चेन का एक हिस्सा भी दूसरे को पहचान नहीं पाता था।
दिल्ली का किंगपिन ‘बेंडे’ गिरफ्तार
पुलिस ने कार्टेल के किंगपिन बेंडे (43) की पहचान की—जो सेनेगल का नागरिक है और दिल्ली में रहता था। वह कई SIM कार्ड एक साथ इस्तेमाल कर रहा था। एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया (encrypted apps), फर्जी पहचान और कपड़ा दुकानों जैसे फ्रंट बिज़नेस का इस्तेमाल कर तस्करी छुपाता था।
स्पेशल टीम ने दिल्ली और नोएडा में 10 दिन की निगरानी की, कई जगह छापे मारे और अंत में उसके अपार्टमेंट से उसे गिरफ्तार कर लिया। 6 नवंबर को उसे तिरुवल्लूर लाकर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जेल के अंदर से चल रहा था रैकेट
समानांतर जांच में पता चला कि पुझल जेल के अंदर विदेशी कैदी लोकल आरोपियों को टास्क देते थे। 31 वर्षीय मथीन अहमद जो हाल ही में जेल से छूटा था, बाहर आने के बाद तमिलनाडु में इस कार्टेल का बड़ा मास्टरमाइंड बन गया।
वह लोकल ऑपरेटिव्स और विदेशी सप्लायर्स के बीच लगातार संपर्क बनाए रखता था। बता दें की 26 नवंबर को पुलिस ने दो कैरियर्स जिसमे मोहम्मद अफरथ (22) बेंगलुरु–चेन्नई रूट से और मोहम्मद अब्दुल्ला आशा (28) आंध्र रूट से भी गिरफ्तार कर लिया था।
इसको लेकर के पुलिस का बयान बी सामने आया है जिसमे IG गर्ग ने कहा है की हम लगातार डीप इन्वेस्टिगेशन और कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशन्स के ज़रिए ऐसे इंटर-स्टेट और इंटरनेशनल ड्रग कार्टेल्स को खत्म कर रहे हैं।
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