क्यों मेघालय-बांग्लादेश बॉर्डर पर अचानक रात 8 बजे से ‘ताला’ लग गया? दो महीने तक कोई नहीं जा सकेगा जीरो लाइन के पास

क्यों मेघालय-बांग्लादेश बॉर्डर पर अचानक रात 8 बजे से ‘ताला’ लग गया? दो महीने तक कोई नहीं जा सकेगा जीरो लाइन के पास

शिलांग/ईस्ट खासी हिल्स। सीमा से लगे गांवों में सोमवार रात अफरातफरी मच गई। मेघालय सरकार ने बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रात आठ बजे से सुबह छह बजे तक नाइट कर्फ्यू लागू कर दिया है। आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हुआ है और कम से कम दो महीने तक जारी रहेगा।

ईस्ट खासी हिल्स की जिला मजिस्ट्रेट आरएम कुरबाह ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं—जीरो लाइन से एक किलोमीटर के दायरे में रात के समय कोई भी आवाजाही नहीं होगी। न भारत की तरफ कोई जा सकेगा और न ही बांग्लादेश की तरफ से कोई आएगा।

आखिर इतनी कड़ी पाबंदी की वजह क्या है?

अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से लगातार खुफिया अलर्ट मिल रहे थे। प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के कुछ सदस्य इस खुले बॉर्डर का फायदा उठा रहे थे। तस्करी गैंग रात के अंधेरे में गाय, सुपारी, ड्रग्स, सूखी मछली और सिगरेट तक ले जा रहे थे। कई बार सीमा के ठीक किनारे बड़ी भीड़ जमा होने की रिपोर्ट भी मिली, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा, “रात का समय इन नेटवर्क के लिए सबसे आसान मौका था। अब वो रास्ता बंद हो जाएगा।”

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कर्फ्यू नहीं, पूरा नेटवर्क तोड़ने की कोशिश

नए आदेश में कई सख्त नियम लागू किए गए हैं। दिन में भी पांच या उससे ज्यादा लोग बिना वजह इकट्ठा नहीं हो सकेंगे। किसी भी तरह का हथियार या हथियार जैसी चीज ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। गायों की तस्करी से लेकर नशीले पदार्थ, सुपारी-पान, चाय पत्ती और सिगरेट तक पर रोक कड़ी कर दी गई है।

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सीमा के पास ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियां, घने जंगल और नदी-नाले हैं, जिससे बाड़ लगाना मुश्किल हो जाता है। तस्कर और घुसपैठिए इन्हीं रास्तों का फायदा उठाते रहे हैं।

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ढाका बस 250 किमी दूर, चटगांव भी नजदीक—क्यों बढ़ी रणनीतिक चिंता

यह इलाका रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका यहां से करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर है। चटगांव पोर्ट और सिलहट भी ज्यादा दूर नहीं। इसी वजह से पुराने समय से कुछ उग्रवादी संगठन इस बॉर्डर को छिपने और आवाजाही के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं।

पूर्वोत्तर के कई राज्य इसी सीमा से जुड़े हैं, ऐसे में यहां घुसपैठ बढ़ी तो पूरे क्षेत्र की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

गांव वालों को अब मिली थोड़ी राहत

सीमा से लगे छोटे-छोटे खासी गांवों में लोग लंबे समय से दहशत में जी रहे थे। रात में अजीब हरकतें, कई बार गोली चलने की आवाज—यह सब रोज का हिस्सा बन गया था। अब कर्फ्यू लागू होने के बाद लोगों को उम्मीद है कि कुछ दिनों तक हालात शांत रहेंगे।

सरकार का कहना है कि परिस्थितियां सुधरने पर पाबंदियों में ढील दी जा सकती है। लेकिन फिलहाल साफ दिख रहा है कि आने वाले दिनों में इस बॉर्डर पर सुरक्षा और भी सख्त होने वाली है।

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