मांडीखेड़ा में ज़हरीला धुएं से 12 से ज्यादा गांव परेशान, बिमारियों का खतरा मंडरा रहा
आसपास के ग्रामीणों का कहना है की सबसे ज्यादा दिक्कत दो बूचड़खानों (Butcher Houses) से हो रही है। दिन में ये बंद रहते हैं लेकिन शाम होते ही इनकी चिमनियां चालू हो जाती हैं और हवा में जहरीला धुआं (Toxic Smoke) भर जाता है।
आरोप है कि एक-दो नहीं बल्कि 12 से ज्यादा गांव इस धुएं की चपेट में हैं। लोग कहते हैं कि प्रशासन (Administration) ने अभी तक इनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई (Strict Action) नहीं की है। हालात ये हैं कि शाम ढलने के बाद खाना तक खाना मुश्किल हो जाता है।
इलाके के रहने वाले इक़बाल, रुस्तम, खालिद, अब्बास, आफताब, इब्राहिम और अमजद बताते हैं कि करीब 20 गांव इस बदबूदार धुएं (Foul Smoke) से परेशान हैं।
लोगों का दावा है कि बदबू 10–12 किलोमीटर दूर तक फैल जाती है। इस गंदगी में पनप रहे मक्खी-मच्छर (Flies & Mosquitoes) बीमारियां फैला रहे हैं। इनसे स्किन डिजीज (Skin Diseases), टीबी (TB), अस्थमा (Asthma) और कैंसर (Cancer) जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
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हेल्थ डिपार्टमेंट (Health Department) के मुताबिक दाद (Ringworm), खाज (Itching), खुजली (Skin Irritation), उल्टी (Vomiting), दस्त (Diarrhoea) और पेट दर्द (Stomach Pain) जैसे मरीज तेज़ी से बढ़ रहे हैं। पहले जिला अस्पताल में ऐसे 20–30 मरीज आते थे लेकिन अब यह संख्या 300 मरीज प्रति दिन तक पहुंच गई है
लोगों का कहना है कि बूचड़खाने के खून (Blood) और गंदे पानी (Dirty Water) को खेतों में फेंका जाता है। प्रशासन को दिखाने के लिए वहां पेड़ लगाए गए हैं लेकिन हकीकत में वही गंदगी बीमारियों को जन्म दे रही है।
बता दें की SDM फिरोजपुर झिरका लक्ष्मी नारायण ने इसको लेकर बयान जारी भी किया है और उन्होंने कहा है की बूचड़खानों की जल्द जांच (Inspection) की जाएगी। अगर वे नियमों (Rules) के खिलाफ चल रहे हैं तो निश्चित रूप से कार्रवाई होगी। पहले भी शिकायतें आई थीं और कार्रवाई की गई है।
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