पीएचडी स्कॉलर रोहिणी घावरी 26 नवंबर को चंद्रशेखर की रैली में, सोशल मीडिया की लड़ाई अब ज़मीन पर
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले कुछ महीनों से डॉ. रोहिणी घावरी ओर भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ के बीच सोशल मीडिया पर वार चल रही है जो अब ज़मीन पर उतरती नजर आ रही है।
https://twitter.com/DrRohinighavari/status/1992158889379323925?t=6rwDqfS9SEfFOmQwM4l9UA&s=19
रोहिणी घावरी ने अपने ट्वीट में कहा, "मंच चंद्रशेखर का हो सकता है लेकिन शपथ मेरी होगी। 26 नवंबर को मैं इस मंच से संविधान की शपथ लूंगी और चंद्रशेखर को उनके कृत्यों के लिए जवाबदेह बनाऊंगी।" उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर कोई उनके साथ अभद्र व्यवहार करता है तो यह पूरा देश देखेगा और महिला सम्मान की रक्षा के लिए कड़ा कदम उठाया जाएगा।
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हाल ही में सुर्खियों में आईं डॉ. रोहिणी घावरी एक पीएचडी स्कॉलर और सामाजिक कार्यकर्ता हैं जिन्होंने अपनी हिम्मत और बेबाक बयानों से लोगों का ध्यान खींचा है। शनिवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि वह 26 नवंबर को चंद्रशेखर की रैली में हिस्सा लेंगी और मंच से संविधान की शपथ लेंगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डॉ. रोहिणी घावरी वल्मीकि समुदाय से ताल्लुक रखती हैं और उनका जन्म मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ। उनके पिता एक सफाई कर्मचारी थे लेकिन रोहिणी ने मेहनत और शिक्षा के दम पर अपनी पहचान बनाई। उन्हें स्विट्जरलैंड में पीएचडी के लिए करीब 1 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप मिली जो उनके संघर्ष और प्रतिभा का प्रतीक है। वह जनपावर फाउंडेशन की संस्थापक भी हैं जो सामाजिक मुद्दों पर काम करती है।
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डॉ. घावरी पिछले कुछ समय से भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ के खिलाफ खुलकर बोल रही हैं। उनका दावा है कि चंद्रशेखर ने कई लड़कियों की जिंदगी बर्बाद की है और उनकी शिकायतों को अनदेखा किया गया। इस बार उन्होंने रैली में शपथ लेकर अपने मुद्दे को जोर-शोर से उठाने का फैसला किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर कोई उनके साथ गलत व्यवहार करता है तो यह पूरा देश देखेगा।
https://twitter.com/DrRohinighavari/status/1984541875911512463?t=lsS9jY-Eve8O6UgBIX1jng&s=19
डॉ. घावरी का नाम पहले भी विवादों में रहा है। जून 2025 में उन्होंने चंद्रशेखर पर गंभीर आरोप लगाए थे जिसके बाद उन्होंने कानूनी कार्रवाई की बात कही थी। हालांकि उनके खिलाफ भी दबाव बनाने और उनकी विश्वसनीयता को चुनौती देने की कोशिशें हुईं जिसके कारण उन्होंने कुछ पोस्ट हटाए थे। इसके बावजूद वह अपने रुख पर अडिग रहीं और अब एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
क्या है उनका मकसद?
डॉ. रोहिणी घावरी का कहना है कि उनका मकसद महिला सम्मान और समाज में न्याय की लड़ाई लड़ना है। उनकी इस पहल को कुछ लोग समर्थन दे रहे हैं जबकि कुछ इसे जोखिम भरा बता रहे हैं।चंद्रशेखर की रैली में उनकी मौजूदगी से आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक माहौल में बदलाव देखने को मिल सकता है। डॉ. रोहिणी घावरी का सफर एक प्रेरणा के साथ-साथ विवादों से भरा रहा है। अब यह देखना होगा कि उनकी यह नई शुरुआत उन्हें कहां ले जाती है।
चंद्रशेखर आजाद की अगुवाई में होने वाली यह रैली आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा मानी जा रही है। उनकी पार्टी, आजाद समाज पार्टी (कांशी राम), दलित-मुस्लिम-ओबीसी गठबंधन को मजबूत करने के लिए इस आयोजन का इस्तेमाल कर रही है। मुजफ्फरनगर का चयन रणनीतिक रूप से किया गया है जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनकी बढ़ती पकड़ को दर्शाता है। रोहिणी घावरी जो स्वयं को अंबेडकरवादी बताती हैं और जिनके पिता इंदौर में सफाई कर्मचारी हैं, इस रैली में अपनी मौजूदगी से चर्चा में हैं। उनके इस कदम से राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।
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हरियाणा की खबरों की ‘मास्टरकी’ सलोनी यादव | 8 साल से जमीनी हकीकत को बेबाकी से आपके सामने ला रही हूँ। न खौफ, न खफा… बस सच, तथ्य और थोड़ा सा हरियाणवी तड़का! जो दिखता है वो बताती हूँ, जो छुपाया जाता है वो खोज निकालती हूँ। हरियाणा की धड़कन से सीधी कनेक्टेड पत्रकार।
