दिल्ली-NCR में दम घुटने लगा: बवाना से मुंडका तक ‘गैस चेंबर’ जैसे हालात, लोकल इलाकों में भी AQI 400 के पार
आज राजधानी में हवा का हाल
अभी सीपीसीबी की नई रिपोर्ट आई ओर उसके ताजा डेटा के मुताबिक दिल्ली का औसत AQI करीब 380–390 के बीच दर्ज हुआ जो सीधे ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। इस AQI को सेहत के लिए खराब माना जाता है।
दिल्ली के आनंद विहार, वजीरपुर, बुराड़ी और चांदनी चौक जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों में हवा और खराब दर्ज हुई जहां लोगों को सुबह से ही आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायतें बढ़ गई हैं।
सुबह के समय स्मॉग की मोटी परत की वजह से विजिबिलिटी भी कम हो गई जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, दफ्तर जाने वाले लोगों और लोकल ट्रैफिक पर सीधा असर दिखा। कई लोगों ने मास्क के बिना बाहर निकलना लगभग नामुमकिन बताया।
बवाना-इंडस्ट्रियल बेल्ट में फैक्ट्रियों के धुएं ने बढ़ाई मुश्किलें
दिल्ली के फैक्ट्री एरिया में हालात ओर भी खराब हो गए है। उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली के बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में AQI कई रीडिंग्स में 430–450 के बीच दर्ज हुआ जो ‘सीवियर’ से भी ऊपर बेहद खतरनाक स्थिति मानी जाती है।
यहां फैक्ट्रियों का धुआं, ट्रकों की आवाजाही और सड़क की धूल मिलकर प्रदूषण को और जहरीला बना रहे हैं, जिससे मजदूरों और लोकल रिहायशी कॉलोनियों में रहने वाले लोगों पर दोहरी मार पड़ रही है। इसी तरह मुंडका और नजदीकी इलाकों में भी PM2.5 और PM10 का स्तर सामान्य सीमा से कई गुना ज्यादा रिकॉर्ड किया गया, जहां AQI 440 के करीब तक पहुंचा।
लोकल दुकानदारों का कहना है कि शाम के समय सड़क पर खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है क्योंकि हवा में धुआं और धूल साफ़ महसूस होती है।
NCR में शामिल नोएडा–गाजियाबाद के मोहल्लों में भी हाल बदतर
दिल्ली के साथ-साथ NCR के हाल भी खराब है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और आसपास के उपनगर भी स्मॉग की चादर में लिपटे नजर आए। नोएडा सेक्टर-11 और सेक्टर-116 में AQI 430–440 के बीच दर्ज हुआ जबकि कई रिहायशी सेक्टरों में हवा लगातार ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी हुई है।
गाजियाबाद के लोनी, साहिबाबाद और इंदिरापुरम की तरफ से भी लोगों ने सोशल मीडिया पर धुंध और बदबूदार हवा की शिकायतें की हैं।
लोकल डॉक्टरों के क्लीनिक में सुबह से ही सांस फूलने, खांसी और एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ती दिख रही है जिससे साफ है कि प्रदूषण सीधे जनता की सेहत पर वार कर रहा है।
AQI स्केल समझिए: आपकी गली की हवा किस जोन में?
सरकारी मानकों के मुताबिक 0–50 तक हवा ‘अच्छी’, 51–100 ‘संतोषजनक’ और 101–200 ‘मध्यम’ मानी जाती है। इसके अलावा 201–300 ‘खराब’, 301–400 ‘बहुत खराब’ और 400 से ऊपर ‘सीवियर’ श्रेणी में आता है जहां स्वस्थ व्यक्ति भी बीमार पड़ सकता है और बीमार, बच्चे व बुजुर्ग के लिए हालात बेहद जोखिम भरे समझे जाते हैं।
फिलहाल दिल्ली-NCR के कई पॉकेट, खासकर इंडस्ट्रियल बेल्ट और घनी आबादी वाले इलाकों में यह स्तर 400 से ऊपर बना हुआ है यानी लोकल स्तर पर हवा सीधी ‘गैस चेंबर’ जैसे हालात तक पहुंच चुकी है।
इस समय दिल्ली में क्यों बढ़ रहा है प्रदूषण?
मौसम विभाग के अनुसार हवा की रफ्तार बेहद कम होने से प्रदूषक कण ऊपर उठने के बजाय जमीन के आसपास अटक रहे हैं और स्मॉग की चादर बना रहे हैं।
वहीं तापमान में गिरावट और इनवर्जन लेयर बनने से धुआं और धूल ऊपर नहीं जा पा रही जिससे हर दिन की हवा एक तरह से पिछले दिन का प्रदूषण लिए घूम रही है।
इसके साथ ही सड़कों की धूल, वाहनों का धुआं, कचरा जलाना, इंडस्ट्रियल यूनिट्स और आसपास के इलाकों में पराली आदि के जलने जैसी चीजें इस जहरीली हवा में लगातार इजाफा कर रही हैं।
लोकल लेवल पर भी खुले में कचरा जलाना, बिना ढंके निर्माण सामग्री रखना और ज्यादा गाड़ियां चलाना प्रदूषण को बढ़ाने वाले आम कारण बन गए हैं।
सरकार और प्रशासन क्या कर रहा है?
दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत निर्माण गतिविधियों पर रोक, डस्ट कंट्रोल, पानी का छिड़काव और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई जैसे कदम पहले ही लागू किए जा चुके हैं। आपकोबता दें कि कुछ चरणों में स्कूलों में आउटडोर गतिविधियों पर रोक और वर्क फ्रॉम होम की सलाह भी दी गई है ताकि लोगों की एक्सपोजर कम हो सके।
फिर भी लोकल स्तर पर इंडस्ट्रियल पॉकेट्स, हॉटस्पॉट मार्केट्स और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर एनफोर्समेंट को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इन इलाकों में सख्त निगरानी और लगातार चालान जैसी कार्रवाई नहीं होगी तब तक हालात में तेजी से सुधार मुश्किल है।
लोकल लोगों की सेहत पर सीधा असर
डॉक्टरों के मुताबिक इस तरह के AQI पर दमा, दिल की बीमारी, एलर्जी और सांस की पुरानी दिक्कत वाले मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। बच्चों और बुजुर्गों में खांसी, सीने में जकड़न, आंखों में जलन और थकान जैसे लक्षण तेजी से बढ़ सकते हैं इसलिए उन्हें कम से कम बाहर निकलने की सलाह दी जा रही है।
लोकल क्लीनिक और हॉस्पिटल में सुबह-शाम ओपीडी पर भीड़ बढ़ी है जहां कई मरीज सिर्फ यह कहकर पहुंच रहे हैं कि “दो दिन से हवा बर्दाश्त ही नहीं हो रही, सांस भारी लग रही है।”
अब क्या सावधानियां जरूरी?
AQI 300 से ऊपर हो तो सुबह-शाम की रनिंग, वॉक या आउटडोर जिम से बचें, खासकर बच्चे और बुजुर्ग। इसके अलावा बाहर निकलना जरूरी हो तो N95 या अच्छे क्वालिटी का मास्क पहनें और लंबा वक्त खुली सड़क पर खड़े रहने से बचें।
घर और ऑफिस में वेट मॉपिंग, कम धूल, जरूरत पड़ने पर एयर प्यूरीफायर और कुछ इनडोर प्लांट्स का इस्तेमाल धूल कम करने में मदद कर सकता है।
फिलहाल दिल्ली के हालात साफ दिखाई दे रहे हैं। दिल्ली-NCR की हवा बेहद खराब है और लोकल स्तर पर भी हर मोहल्ले को अपना ख्याल खुद रखना होगा। प्रशासन के कदम जरूरी हैं लेकिन जब तक लोग खुद जागरूक होकर अपनी गली-मोहल्ले में धूल, धुआं और कचरा जलाने जैसी आदतों पर ब्रेक नहीं लगाएंगे तब तक हर सर्दी में यह दम घोंटने वाली कहानी दोहराई जाती रहेगी। विनोद यादव (विराट भारत न्यूज)
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