इंडोनेशिया से उठी राख का बादल भारत की तरफ! जानें किन इलाकों पर पड़ सकता है असर
यह बादल मुख्य रूप से सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) से भरा है, जबकि ज्वालामुखी राख की मात्रा कम से मध्यम बताई जा रही है। सबसे राहत की बात यह है कि यह प्लम मिड-लेवल एटमॉस्फियर में मौजूद है और जमीन तक नहीं पहुंच रहा। इसलिए, इंडियामेटस्काई ने साफ किया है कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। हालांकि, कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में SO₂ का असर महसूस किया जा सकता है।
किन इलाकों पर सबसे ज्यादा असर?
एजेंसी के मुताबिक, प्लम का एक हिस्सा हिमालयी क्षेत्र से टकराएगा, जिससे सल्फर डाइऑक्साइड नीचे उतरकर कुछ खास जगहों को प्रभावित कर सकता है। इनमें शामिल हैं—
नेपाल की पहाड़ियां
हिमालयी क्षेत्र
उत्तर प्रदेश की तराई बेल्ट — गोरखपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी आदि
इसके बाद यह बादल आगे चीन की ओर बढ़ जाएगा।
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दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और यूपी के बड़े हिस्सों में ऐशफॉल (राख गिरने) की संभावना बहुत कम बताई गई है।
जमीन पर AQI में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखेगा। हल्के-फुल्के पार्टिकल्स कुछ जगहों पर गिर सकते हैं, लेकिन मात्रा बहुत कम होगी।
फ्लाइट्स पर असर?
हवाई यातायात पर मामूली असर संभव है।
कुछ उड़ानें देरी या रूट बदलाव का सामना कर सकती हैं।
स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ेगा?
चूंकि प्लम ऊपरी वायुमंडल में है और SO₂ का असर ज्यादातर पहाड़ी इलाकों पर होगा, इसलिए दिल्ली-NCR और बाकी मैदानी क्षेत्रों में आम लोगों को आंखों में जलन या सांस की दिक्कत जैसा कुछ महसूस नहीं होगा।
लेकिन संवेदनशील लोग—अस्थमा या COPD मरीज—तराई व पहाड़ी इलाकों में सावधानी बरतें।
कितने दिन चलेगी यह स्थिति?
इंडियामेटस्काई का कहना है कि यह स्थिति कुछ दिनों तक बनी रह सकती है, लेकिन यह किसी बड़े प्रदूषण संकट में नहीं बदलेगी।
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